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जयपाल सिंह मुंडा जीवनी।𑴓𑴥𑴠𑴱𑴧 𑴫𑴲𑵀𑴬 𑴤𑴵𑵀𑴘𑴱 Jaipal sigh munda j

  Jaipal Singh Munda koin tha 

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आदिवासी वीर योद्धा

इतिहास में हमें सिखाया गया है कि भारत को आजादी हमारे भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दी थी लेकिन भारत की आजादी के पहले भी बहुत से हमारे योद्धा थे जिन्होंने भारत को आजादी प्राप्त कराने में बहुमूल्य काम किया था।


जब भारत की आजादी का नाम लिया जाता है तो हमें सिर्फ गांधी जी का नाम याद आता है लेकिन उनसे भी पहले बिरसा मुंडा, रानी  लक्ष्मीबाई, वीर टंट्या भील, पेरियार, वीर गुंडाधूर धूरवा एवं कोमोराम (कुमूरम) भीम, बाबुराव पुल्लेसूर शेडमाके आदि ऐसे बहुत बड़े बड़े नाम हैं जिन्होंने भारत को अंगेजो एंव मनुवादी से आजादी दिलाने में सबसे बड़ा हाथ था।


शिक्षा को बढ़ावा दिया

वैसे तो हमें सिर्फ यही नाम याद है लेकिन आप में से शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत के संविधान को आगे बढ़ाने में और भारत का नाम रोशन करने में श्री ईश्वरदास जयपाल सिंह मुंडा का भी बहुत बड़ा हाथ था।


 आप में से बहुत सारे लोग शायद यह नाम कभी सुने ही नहीं होंगे! पहले का समय ऐसा है जहां पर हथियारों के बगैर कोई  लड़ाई नहीं लड़ी जाती थी और आज का समय ऐसा है जहां पर हथियारों से नहीं बल्कि एजुकेशन से लड़ाई लड़नी चाहिए। हमें एजुकेशन को ही अपना हथियार बनाना है और इस दौर पर अपनी पकड़ बनाए रखनी है।


संविधान में सहयोग

जयपाल सिंह मुंडा एक ऐसा नाम है जिसने अपनी जिंदगी में कभी हथियार का उपयोग नही किया उसके बावजूद भी इस शख्स ने देश के लिए बहुत बड़ा काम किया था।


 जयपाल सिंह मुंडा एक ऐसे आदमी था जिन्होंने कभी अंग्रेजों के खिलाप बंदूक नहीं उठाई, लेकिन वहा उसके बावजूद भी एजुकेशन को हतियार बनाकर ऐसी लड़ाई लड़ी जो हमारे  कल्पना के बाहर है! आज के नवजवानों को इनसे सीख लेनी चाहिए।


ज्यादातर लोग इस नाम को नहीं जानते है और ना ही आपको सोशल मीडिया पर इनके बारे में इतनी प्रॉपर जानकारी मिल पाएगी। दोस्तों यह वह शख्स हैं जिन्होंने संविधान में 

आदिवासियों के हक के लिए बहुत संघर्ष किया, और आप लोगों को पता ही है आदिवासी मूलनिवासी है इसके बावजूद पिछड़ते जा रहे थे और संविधान बनाने के पहले आदिवासियों का बहुत बुरा हाल था। 


अंग्रेजों और ब्राह्मणवाद से क्योंकि इस जाति के लोगों को नीच व छोटे जाति के लोग कहते थे जो सिर्फ मुंशीयो, बड़े बड़े सेठ साहूकार के यहां काम वाले मजदूर मानते थे इस प्रकार प्रताड़ित किया जाता था क्योंकि  ज्यादा आदिवासी अशिक्षित थे। इसी वजह से गांव में रहने नही दिया जाता था और आदिवासियों को जंगल में खदेड़ा दिये जाते थे इसीलिए आज भी सभी आदिवासी जंगलो के पास है! इसी वजह से जयपाल सिंह मुंडा ने देख और आदिवासियो के हक के लिए संविधान बनाने में काफी हद तक सहयोग किया है।


जयपाल सिंह मुंडा का परिचय


जयपाल सिंह मुंडा का जन्म खूंटी के टकरा गांव मे 3 जनवरी 1903 मैं रांची के बिहार में हुआ था। उनके पिता का नाम अमरू पाहन मुंडा था जयपाल सिंह मुंडा भारत के आदिवासी और झारखंड के आंदोलन के सर्वोच्च नेता थे और वह एक पत्रकार, संपादक, लेखक, और स्पोर्ट्समैन थे।


 सन 1925 के अंदर ऑक्सफोर्ड ब्लू का खिताब पाने वाले एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे। इन्होंने भारत को सन 1928 एम्स्टर्डम में पहली बार हॉकी ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करवाया था।इन्होंने ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया था और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन भी किया था।



गांव की पाठशाला में इन्होंने अपनी एजुकेशन की थी उसके बाद उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता देखकर उन्हें मिशनरी स्कूल में डाला गया और उसके बाद ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी तक का सफर उनका रहा था।


जयपाल सिंह मुंडा हॉकी


 यह पढ़ाई में बहुत कुशल थे लेकिन खेलकूद में भी बहुत माहिर थे और इनका फेवरेट खेलता हॉकी! लेकिन हमारे भारत में बहुत सारे लोगों को यह पता ही नहीं है कि 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक्स में जयपाल सिंह मुंडा गोल्ड मेडलिस्ट थे! और तब उनको टीम इंडिया का कप्तान का पद मिला था और जब उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल आया था तब वह हॉकी में डिफेंडर का पद था।


1928 में भारत को गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब टीम इंडिया के लीड कर रहे थे तब 17 मैचेस हुए थे और 17 में से कुल 16 मैच इस भारत को इन्होंने जीत आए थे और एक मैच ड्रॉ हो गई थी! 

संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा

संविधान बनाया जा रहा है और उसमें अगर यह लिखा जा रहा है कि सभी सामान है तो वहां पर जमीन का मालक और देश का मालक आदिवासी को भी सामान न्याय मिलना चाहिए इसके लिए संविधान सभा में आवाज उठाने वाले सक्स थे जयपाल सिंह मुंडा! 


जब इनका खिलाड़ी करियर खत्म होगा उसके बाद वह भारत आए और भारत आने के बाद उन्होंने देखा कि भारत में आदिवासी समाज क्या है?कैसा है? और उनको आदिवासी की तरफ से संविधान सभा में जाने का उनको एक मौका मिला और जब वह गए उन्होंने दौरा किया तब वह झारखंड एरिया में उन्होंने देखा कि यह आदिवासी समाज बेघर पड़ा है जोकि वह जगह के आदिवासी हकदार थे!


तब उन्होंने यह ठान ली की अब वह राजनीति में जाएगी और राजनीति का अच्छा खासा अभ्यास उनके पास था। उसके बाद वह राजनीति में गए और राजनीति में जाने के बाद सभा में आवाज भी उठाई आदिवासी इस देश का मालक है इसलिए उसको भी समान हक और समानता मिलनी चाहिए।


jaipal singh munda and ambedkar

जयपाल सिंह मुंडा ने डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को उन्होंने सुझाव दिया था पर उनके सुझाव के अनुसार संविधान में आज के समय में आदिवासी का एक वजूद है और उनकी वजह से आज आदिवासी समाज का व्यक्ति पढ़ लिख रहा है और आगे बढ़ रहा है। जयपाल सिंह मुंडा ने कभी भी अपने जीवन में हथियार का उपयोग नहीं किया लेकिन अपने एजुकेशन के दम पर और उसका सही इस्तेमाल किया और उन्होंने लड़ाई लड़ी उसके बावजूद भी इनका नाम ज्यादातर कोई नहीं जानता!


वह एक अच्छे हॉकी प्लेयर थे और उन्होंने बहुत अच्छा नाम भी कमा लिया था वह चाहते तो भारत आकर अपनी खुशाल जिंदगी बिता सकते थे लेकिन उन्होंने अपने एजुकेशन का इस्तेमाल सही रास्ते पर किया है और आज उनकी वजह से आदिवासी समाज प्रगति कर रहा है। संविधान में आदिवासी के 6 सदस्य रहने के बावजूद भी यह एक ऐसे सदस्य थे जिसने आदिवासी जनजाति के लिए आवाज उठाई।



आदिवासी महासभा का गठन

सन 1938 के अंदर जयपाल सिंह मुंडा ने जनवरी के अंदर आदिवासी महासभा की अध्यक्षता प्राप्त की और बिहार से एक अलग झारखंड राज्य बनवाया जाए उसकी मांग उन्होंने की थी। जयपाल सिंह मुंडा आदिवासी जनजाति के लिए एक प्रकार से एक बड़ी आवाज के साथ साथ उनकी ताकत भी बन गए थे। कुछ समय बीतने के बाद 1950 के अंदर आदिवासी महासभा संगठन नाम बदलकर झारखंड पार्टी संगठन रखा गया।


सन 1952 के अंदर पहले लोकसभा चुनाव के अंदर खूंटी सांसद के रूप में चुने गए थे। उनकी मांग थी कि आदिवासियों को दलित वर्गों के अंदर ना रखा जाए और उनके साथ उन्हें न रखा जाए बल्कि सब लोगों को सम्मान न्याय मिला जाए। जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासियों के लिए और भी बहुत सारी मांगों के लिए आवाज उठाई थी और उनके हितों के लिए हमेशा वह आगे रहे थे।


जब सन 1950 के अंदर झारखंड पार्टी का गठन किया गया था और उसके 2 साल बाद मतलब 1952 के इलेक्शन में 32 विधायकों के साथ बिहार की सरकार के सामने बड़े प्रतियोगी के तौर पर सामने आए तब जाकर कांग्रेस पार्टी को यह बात समझ में आ गई थी कि अब झारखंड कांग्रेस के लिए खतरा सामान है। उसके बाद अंत में राजनीतिक षड्यंत्र मैं आकर पार्टी का विलय कांग्रेस के अंदर करना पड़ा।


जयपाल सिंह मुंडा की पार्टी मैं बिहार चुनाव के अंदर विधानसभा में 34 सीटें और लोकसभा में 5 सीटें जीतकर बहुत ही ज्यादा बढ़िया प्रदर्शन दिया था। जयपाल सिंह मुंडा बिहार के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने भारत और एशिया छोड़कर अफ्रीका के अंदर एक प्रोफ़ेसर के तौर पर भी काम करने का अनुभव रखा है। इन्होंने रायपुर के अंदर वाइस प्रिंसिपल का भी अहम भूमिका निभाई हैं और इन्होंने मैसूर में भी नौकरी करने का अनुभव रखा है।


संगठन के दौरान जभी भी भाषण देने का समय आता था तब उन्होंने अपनी मातृभाषा नागपुरी भाषा में हमेशा से भाषण दिया है और हमेशा से हम अपनी मातृभाषा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाए हैं। उनका कहना था जब झारखंड एक राज्य बन जाए तो नागपुरी भाषा वहां की मुख्य भाषा में संभावित हो और नागपुरी भाषा में ही सबको बातचीत करनी चाहिए। 


जब कोई मुंडारी प्रदेश में जाते तब मुंडारी भाषा का प्रयोग भी करते थे और जब देश के नेताओं के साथ नेगोशिएशन या पाक्षित करनी होती थी तब वह अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते थे। इस तरीके से जयपाल सिंह मुंडा कई भाषाओं के ज्ञाता होने के साथ वहा देश सेवा और आदिवासियों के हक की वकालत हमेशा से करते रहे और झारखंड के आदिवासियों के लिए अपने अंतिम समय तक यानी अंतिम सांस तक काम करते रहे और आदिवासियों के लिए सेवा दी।


जयपाल सिंह मुंडा की मृत्यु


आदिवासी जनजाति के लिए वीर योद्धा (भगवान) के समान थे। जयपाल सिंह मुंडा की मृत्यु सन 1970 में दिल्ली में 20 मार्च के दिन हुई थी तब वह 67 साल के थे और दुनिया छोड़कर चल बसे थे। 20 मार्च 1970 में मस्तिक में रक्त स्त्राव बढ़ जाने के कारण 67 साल की उम्र में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।

जब वह 67 साल के थे तब वह अपने 4 बच्चों को छोड़कर चल बसे जिनमें से एक बेटी थी और तीन बच्चे थे।


आज के नवयुवकपीठी को इनसे सीख लेनी चाहिए।


Conclusion

आज आपने भारत के एक महान शख्स जयपाल सिंह मुंडा के बारे जाना है। उनके जीवन और रहन-सहन के बारे में हमने आपको जानकारी दी। हमने आपको जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी जनजाति के लिए क्या किए कार्य और उनकी एजुकेशन और स्पोर्ट्स में कितने आगे थे उसके बारे में जानकारी दी गई। जिन भी लोगो को उनके एजुकेशन करियर, स्पोर्ट्स करियर और पॉलीटिकल करियर तीनों के बारे में नहीं पता था तो उसके बारे में भी बताया है। मुझे आशा है आपको यह आर्टिकल काफी ज्यादा पसंद आया होगा।



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