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दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा: इतिहास, रहस्य और आदिवासी परंपरा की पूरी सच्चाई Danteshwari Temple Dantewada: History, Mystery and the Truth of Tribal Tradition

दंतेश्वरी मंदिर: आस्था, इतिहास और आदिवासी संस्कृति का संगम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, गोंडवाना परंपरा और बस्तर की ऐतिहासिक पहचान का केंद्र भी है। यहां शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। दंतेश्वरी मंदिर का इतिहास दंतेश्वरी मंदिर का निर्माण लगभग 14वीं शताब्दी में बस्तर के काकतीय शासकों द्वारा कराया गया था। माना जाता है कि जब काकतीय वंश के राजा वारंगल से बस्तर आए, तो वे अपनी कुलदेवी दंतेश्वरी को भी साथ लाए। शक्ति पीठ से संबंध पुराणों के अनुसार: माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्ति पीठ बने। दंतेवाड़ा में माता का दांत (दंत) गिरा था। इसी कारण इस स्थान का नाम पड़ा – दंतेवाड़ा और देवी का नाम हुआ दंतेश्वरी। यह मंदिर आज भी बस्तर राजपरिवार की कुलदेवी के रूप में पूजित है। --- आदिवासी आस्था और गोंडवाना संब...

आदिवासी होली कैसे मनाते है? आदिवासियों का होली के बारे में क्या मान्यता है? Tribal Holi celebration in India

  आदिवासी होली कैसे मनाते है ? इतिहास एक ऐसा सच है जो हमने कभी देखा नहीं है लेकिन यह चीज हमें स्वीकार नी पड़ती है। इतिहास हमें अपने जीवन में बहुत कुछ सिखाता है और भविष्य की कल्पना करने में मदद करता है। वैसे ही कुछ हम आपको पुराना इतिहास बताते हैं जो करोड़ों साल पुराना है। वैसे तो हम अपनी भारतीय संस्कृति के अनुसार होलिका को जलाते भी है और अगले दिन होली खेलते भी है। लेकिन यहां   हमारे आदिवासियों में मान्यता अलग हैं। आज आप जानेंगे कि आदिवासी होली कैसे मनाते हैं? होली के बारे में आदिवासियों की विचारधारा आज हम आपको होली त्योहार से जुड़ी आदिवासियों की विचारसरणी के बारे में बताएंगे। कुछ आदिवासियों का मानना है कि होली जलाना भी बहुत बड़ा पाप है! शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी और यह लेखन भी बहुत ही खास है की आदिवासी होली कैसे मनाते हैं? भारत के अंदर कई सारे ऐसे आदिवासी है जो आज भी अपने कोयातुर समाज के विधि-विधान का पालन करते हुए। आज भी होली पर्व मनाते है। लेकिन आज के समय में जिस प्रकार से होली के बारे में कथा कहानी में बताया व पढ़ाया जाता है। इस प्रकार कदापि नही है। क्योंकि जब से हम...

गोंडी व्याकरण, गोडवाना भाषा सिखें|

जय सेवा सागा जनो ,       कुछोडों सैल प्रथम पृथ्वी का निर्माण हुआ, जो आगे चलने दो महाद्वीप में हुआ था, जैसा दो महाप्रलय का निर्माण, एक था यूरेशिया और दूसरा था गोंडवान महाप्रलय ये जो गोंडवाँ महाप्रपात एक महाप्रलय था| यह प्राचीन काल के प्राचीन महाप्रलय पैंजिया का दक्षिणी था| उत्तरी भाग के बारे में यह बताया गया| भारत के महाद्वीप के आलावा में महाद्वीप गो और महाद्वीप, जो मौसम में उत्तर में है, का उद्गम स्थल| आज से 13 करोड़ साल पहले गोंडवांस के वायुमंडलीय तूफान, अंटार्टिका, अफ़्रीका और दक्षिणी महाप्रलय का निर्माण |       गोंडवाना नाम नर्मदा नदी के दक्षिण में प्राचीन गोंड राज्य से व्युत्प्न्न है, गोंडवाना नाम का सबसे पहला विज्ञान है | से गोंडिय़ों की भाषा का उद्गम था|          गोंडी भाषा में भारत के एक बड़े आकार का है| जैसा आज की दुनिया में लागू होने वाली भाषा के साथ लागू होने वाली भाषा में जलवायु परिवर्तन की भाषा पर लागू होता है, अगर कोई वैरिएंट दुनिया में लागू होता है, तो संस्कृति, सभ्यता, भाषा, धर्म, कुछ भी लागू होता है| भाषा शब्द शब्द क...