कोमाराम भीम के बारे में —
कोमाराम भीम की जीवनी हिंदी में:
आप सभी लोगों को पता है कि भारत एक ऐसा देश है जहां पर काफी सारे लोगों ने शासन किया और अत्याचार किया। लेकिन इन सभी से लड़ाई के लिए भारत में काफी सारे वीर योद्धाओं और क्रांतिकारी का भी जन्म हुआ है। आज के लेख में हम कोमाराम भीम के बारे में जानने वाले हैं, जिसमें एक ऐसे क्रांतिकारी व्यक्तित्व थे, जिनके द्वारा सिंघाड़े के निजाम आसफ जली ने क्रांतिकारियों के खिलाफ लड़ाई करते हुए ईश्वर को प्राप्त किया था।
यहां पर हम कोमाराम भीम की जीवनी हिंदी में जानने वाले हैं। जिन लोगों को भी कोमाराम भीम के बारे में नहीं पता है तो आज हम कोमाराम भीम की पूरी जीवनी बताएंगे। जिससे आप सभी को पता चल जाए कि उन्होंने किस देश के लिए कितने बड़े-बड़े काम करते हुए अपनी जान दे दी।
कोमराम भीम ने देश की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन जंगल में ही बिताया। इनमें से "जल, जंगल और जमीन" वाले नारे आज भी सभी लोगों को याद हैं। इस नारे का मतलब यह है कि जो भी लोग जंगल में रहते हैं उन सभी को पूरे संसाधन का प्रयोग करने का अधिकार मिलना चाहिए।
कोमराम भीम जीवनी एवं जानकारी
पूरा नाम - कोमाराम भीम
निक नेम। - भीम
जनम - 22 अक्टूबर 1901
जन प्रोडक्शन - संकेपल्ली, हैदराबाद, ब्रिटिश भारत (वर्तमान तेलंगाना, भारत)
मृत्यून्यू - 8 अक्टूबर 1940
मृत्यु स्थान - जोधे घाट, हैदराबाद निवासी, ब्रिटिश भारत (वर्तमान तेलंगाना, भारत)
धर्म -जुबेनी
जाति - गोंड
पटकनी - सोमबाई
नारा - जल जंगल भूमि
विद्रोह - हैदराबाद निज़ाम और ब्रिटिश के विरुद्ध
सेना - गुरिल्ला सेना
आज़ाद - कोमराम भीम (1990), (आरआरआर 2022)
दासता - भारतीय
कोमराम भीम कौन थे
अगर हम आज भी इतिहास की बात करें तो मुगल और नाइजीरिया के बारे में हमें पढ़ाया और सिखाया जाता है। लेकिन कभी-कभी कोमरम भीम जैसे महान व्यक्ति के बारे में बिल्कुल भी नहीं बताया जाता है। वह एक गुमनाम तरह का हो गया है और इसका सारा दोष शिक्षण प्रणाली की ओर ही जाता है। हमारे इतिहास की किताब में काफी महान लोगो को शामिल किया गया है।
जिस तरह से एक इंसान को रोटी और खाना आदि की जरूरत होती है। इसी प्रकार से हमें इतिहास की सभी चीज़ों के बारे में भी पता होना चाहिए कि वह अच्छी है या फिर बुरी बात ही क्यों ना हो। जब आपको अपने इतिहास के बारे में सभी जानकारी मिलेगी तब आप आगे भी लोगो को बताएंगे।
कोमराम भीमतेलंगाना के एक ऐसे नेता थे। जल, जंगल और ज़मीन का एक ही नाम था और इसी वजह से उन्होंने अपने जीवन में काफी परेशानियों का सामना भी किया। लेकिन आज भी इनके बारे में बहुत ही कम लोगो को पता है। लेकिन वेरीसा मुंडा, सिद्दू कान्हू जैसे अन्य आदिवासी नायकों के बारे में आपको हर जगह पढ़ने के लिए मिल जाता है।
कोमराम भीम का जीवन परिचय
कोमाराम भीम का जन्म तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के संकेपल्ली गांव में गोंड जाति के परिवार में 22 अक्टूबर 1901 को हुआ था। यह भारत के ऐसे जन-जातीय नेता थे, जिन्होंने सिंगापुर की मुक्ति के लिए आसफ जाही राजवंश से संघर्ष किया था। कोमराम भीम ने निज़ाम के कोर्ट-कचहरी और आलोचना को सीधे तौर पर चुनौती दी। इन्होनें अपने पूरे संघर्ष को वन में राह कर लिया था।
उनका परिवार होने के कारण यजबान के कारण पूरी तरह से खेती पर ही प्रतिबंध था। यह जंगल से ही अपने खाने की सभी चीजें को पता था, इसका मतलब यह है कि पूरा जीवन सिर्फ जंगल पर ही आधारित था। लेकिन उस पर सभी जंगलों पर सरकारी वन विभाग का ही अधिकार था। लेकिन वो सभी जंगलों को धीरे-धीरे ख़त्म करते जा रहे थे।
कोमराम एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं की थी। क्योंकि ये एक था जनाब जो कि जंगल में रहता था और आपको पता है कि जंगल में कभी स्कूल भी नहीं गया था। इन्होने अपने लोगों के रिश्तों को इतने गौर से देखा और एक ही से अपने जीवन में काफी सारी चीजें सीखे।
'जेबीए जीवन विद्धांसम' पुस्तक में लेखक मैपति अरुण कुमार ने बताया है कि कोमराम भीम ने बचपन से ही पुलिस, व्यवसायियों और लक्ष्यों के बीच पहचान पर विशेष ध्यान दिया है। अपने जीवन को जीने के लिए वे काफी सारे स्थान पर रह रहे हैं। जिन अधिकारियों के द्वारा अवैध गरीबों से बचाव किया गया।
कोमराम भीम के पिता की मृत्यु
1900 में हैदराबाद के सन के सैनिक भी वन अधिकारी या जमींदार थे, वे काफी बड़े पैमाने पर पदासीन थे। जो भी खेती के परमिट के द्वारा किया गया था उस पर कर भी लिया गया था। साथ में पक्की की पत्नी और बेटी के साथ बुरा सलूक और बच्चों की बेटी को काट दिया गया था।
कभी-कभी पेड़ को काटने या उसकी योग्यता के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया जाता था। इन ऑल रिज़ाम को मिले अधिकार के लिए कोमराम भीम के पिता के फ़ास्ट रेस्टोरेन्ट अधिकारियों और जमीदारो ने हत्या कर दी। इसके बाद करीमनगर के जमींदारी लक्ष्मण राव के पास निवास लगे थे और इन सभी आक्रमणों को देखते हुए कोमराम भीम बड़े हुए थे।
कोमराम भीम यहाँ पर भी निज़ाम शासन के अधिकारी के लिए चिंता व्यक्त करने के लिए गए थे। लेकिन एक दिन उसकी एक अधिकारी की हत्या हो जाती है और आसाम में भागना होता है। अब आसाम में वह चाय के बागों में काम करके अपनी जिंदगी को शुरू करती है।
कोमराम भीम का विवाह
भीम जी की शादी सोमबाई से होने के बाद अब शादी होने के बाद एक किसान की तरह अपने जीवन को उजागर करना चाहते हैं। लेकिन जमीदार और बड़े अधिकारी के द्वारा कर योग्य और काफी बेकार व्यवहार से सभी लोग परेशान हो गए थे और ऐसी ही एक बात को देखने के लिए कोमराम भीम हैदराबाद के निज़ाम मिलने के लिए गए थे और अपनी बात रखी थी लेकिन वहां उनकी किसी भी बात पर कोई गौर नहीं किया गया।
जब कोमराम भीम ने सभी कानूनी बातें बताईं तो उसके बाद वह अपना अधिकार हासिल करने के तरीके को स्वीकार करने लगे। वह अपने आस-पास के जिलों में रहने वाले सभी गोंड समुदाय के लोगों को इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। जब गोंड समुदाय के सभी लोग एक साथ सामूहिक गठबंधन के लिए राजी हो जाते हैं तो वो अपनी गुरिल्ला सेना को बना लेते हैं। अपने इस आंदोलन को और तेजी से करने के लिए 'जल जंगल भूमि' नारा भी बोला जाता है और यह नारा काफी तेजी से लोगों में लोकप्रिय हो जाता है।
कोमराम भीम का बलिदान
जब कोमाराम भीम ने अपनी गुरिल्ला सेना को लेकर हैदराबाद के निज़ाम और अंग्रेज़ो के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया था तो बहुत तेज़ी से काम किया था। इसी कारण से लोगो में निज़ाम और ब्रिटेन का विरोध करना काफी आसान सा लग गया और यह काफी लोकप्रिय हो गया। निज़ाम और अंग्रेज़ों को देखकर ये सारी चीज़ें बिल्कुल भी खुश नहीं थीं। यह सभी लोग लग रहे थे कि कोमाराम भीम के कारण वो अपनी हुकूमत को भी खो सकते हैं।
निज़ाम और निज़ाम ने कोमराम भीम के खिलाफ कुछ ऐसे गुप्तचर लगाए जो उनकी खबर को जल्द से जल्द निज़ाम के पास पहुंचा सके। जब भी कोई खबर एनवाईएसई तक पहुंची तो उन्होंने षडयंत्र रचना शुरू कर दी थी और उनकी सिर्फ एक ही कोशिश थी कि कोमराम भीम आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन वो इन सभी चीजों में शामिल होते जा रहे थे। फिर बाद में अब्दुल सत नाम के एक व्यक्ति द्वारा आग लगाने का आदेश दिया गया।
निज़ा ने अपनी बड़ी सेना को कोमाराम भीम को जहाज़ के लिए रवाना किया और घाट पर भीम को अपने 15 साथियों के साथ ले लिया। धीरे-धीरे उन्हें ढलान की ओर ले जाया गया जहां आग में कोमराम भीम और उनके 15 साथियों की हत्या कर दी गई। निज़ाम ने उनके शरीर को बुरी तरह से जलाया और उसके बाद भी उनकी हालत खराब हो गई। कि फिर से भीम जिंदा वापस ना आ जाए तो वह सभी को भी मारी गई क्योंकि उनके शरीर को देखने के लायक भी नहीं बचाया गया था।
कोमराम भीम की पूर्णिमा के दिन 8 अक्टूबर 1940 को मृत्यु हो गई थी। इस घटना को देखकर जोधेघाट के पहाड़ भी रो पड़े थे। वहाँ पूरे जंगल में जंगल कोमराम भीम अमर रहे के नारे गूंज रहे थे।
कोमराम भीम की विरासत
सरकार ने उनके बलिदान का काफी सम्मान किया है और उनके सहयोगियों के साथ जिस आसिफा ने जिस जिले में शहादत दी थी, उस जिले का नाम 2016 में "कोमराम भीम" रखा गया है। वैसे भीम को सभी लोगों ने एक फ्लॉप नेता के रूप में देखा था। लेकिन वैश्वीकरण वो नेता नहीं थे।
अब आने वाले सभी वास्तुशिल्पियों को उनके बलिदान और प्रतिमाओं के बारे में पता होना चाहिए। अभी भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग उनके शहीद वाले दिन को असावुजा पूर्णिमा के रूप में मना रहे हैं और हम सभी उनके प्रशंसकों के माध्यम से उन्हें याद करते हैं।
कोमराम भीम एएनवी आरआरआर स्टोरमैन
कोमराम भीम के ऊपर "1990" में एक फिल्म कोक भी बनाई गई है। इसमें आपको भीम के प्रेरणादाई जीवन के बारे में सारी बातें दिखाई गई हैं। इसी वजह से लोगो ने इसे काफी पसंद भी किया है।
इनमें से एक जिंदगी पर फिर से एक फिल्म बनने जा रही है जिसका नाम है आरआरआर। फिल्म में कोमराम भीम का रोल एन थिएटर जूनियर और अल्लुरी सितारा रेस्टुरेस्ट का किरदार रामचरण का तेजा किरदार नजर आने वाला है। बताया गया है कि यह 7 जनवरी 2022 को रिलीज हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. कोमराम भीम कौन थे?
कोमराम भीम एक आदिवासी गोंड समुदाय के वीर यौध्दा थे। जिन्होन ने अपने लोगो के अधिकार के लिए निज़ाम और इंग्लैंड के खिलाफ विद्रोह कर दिया था।
Q. कोमराम का जन्म कब हुआ था?
कोमराम भीम का जन्म 22 अक्टूबर 1901 को हुआ था।
Q. कोमराम भीम की पत्नी का नाम क्या था?
कोमराम भीम की पत्नी का नाम सोमबाई था।
Q. भीम की मृत्यू कहां हुई है?
कोमराम भीम की मृत्यू जोधेघाट में हुई है।
Q. कोमराम भीम की जाति कौन-सी है?
कोमराम भीम की जनजाति (गोंड) है।
Q. कोमराम भीम पर कौनसी नूतन बन रही है?
कोमराम भीम के जीवन पर RRR बन रही है
Q. कोमराम भीम का जन्म कहाँ हुआ था?
कोमराम भीम का जन्म मां संकेपल्ली गांव में हुआ था।
Q. कोमाराम भीम की मृत्यु किस दिन (तारीख) हुई है?
कोमराम भीम की मृत्यु 8 अक्टूबर 1940 को हुई थी।
Q. कोमाराम भीम का नाम किस जिले में है?
कोमराम भीम नाम का जिला तेलंगाना में है।
निष्कर्ष
आज के इस लेख में आप सभी लोगों ने एक महान व्यक्ति कोमराम भीम के बारे में जाना है। यहाँ पर हमने आपको कोमराम भीम के जन्म, इतिहास, माता और पिता के बारे में सभी जानकारी देने का प्रयास किया है। अगर कभी भी आपको कोमराम भीम की जीवनी हिंदी में बता दी जाए तो अब काफी आसानी से बता पाएंगे। आपको कोमराम भीम से संबंधित कोई भी और सवाल हो तो आप कमेंट में हमसे पूछ सकते हैं

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