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प्रकृति मार्ग कोया पुनेम को समझे । पुनांग पंडुम का संदेश (“जानो-परखों-मानो") जाने समझे ।

 दुनिया के सबसे जागरूक प्रजातियों द्वारा मनाऐ जाने वाले 

 नवाखाई महापर्व ,पुनांग पंडुम का संदेश (“जानो-परखों-मानो")

जाने समझे और आण्डम्बरो से तौबा कर प्रकृति मार्ग  कोया पुनेम को समझे ।



(1) मलेरिया परजीवी से सामना करने की कोयतोरियन टेक्नोलॉजी

प्रणाम÷ लुले डयाना पाटा , नेसमेह वनस्पति का प्रयोग,  मलेरिया परजीवी के पनपने वाले जगहों की जानकारी,  व उनको मिटाने का रश्मो के द्वारा उपक्रम

(2) दुनिया की प्रथम कृषिकरण के प्रमाण "गोडूम डिपा" (ऊपरी टिकरा मरहान) पर उगने वाली अर्ली वैराइटी जिसने मानव विकास क्रम में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है उसके प्रति सम्मान देना 

प्रमाण:- भादो (अगस्त- सितंबर) में पकने वाली दुनिया की सबसे अर्ली वैराइटी के चावल  बालियों के पुजन का रश्म, पुनांग तिन्दाना पाटा /गीत में जिक्र, 
प्रमाण:- ढलती बरसात के दिनों में मनुष्यों में आयरन की कमी अक्सर हो जाती है जिसको पुरा करने सामान्य चांवल से 75 गुना ज्यादा आयरन वाले धान की अदभुत वैराइटी के चाॅवल के पकवानों का परिवार के सभी सदस्यों को सेवा वितरण 
प्रमाण:- पालोड़ आंकी पाटा द्वारा व  पालोड़ पत्तों के द्वारा इलाज करने की कोयतोरिन चिकित्सा पद्धति

(5)टीबी /खासी जैसे संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए :- पवित्र कोरिया पत्ते द्वारा एक साथ पुरे गोण्डवाना लैण्ड मे एक ही दिन दवा के रूप में डोज देकर संक्रमण की सम्भावना को न्यूनतम करना 

(7) खेल खेल में शिक्षा को प्रोत्साहन÷ छोटे बच्चों की शिक्षा को खेलकूद  आधारित गोटूल एजुकेशन पद्धति से सिखाने को प्रेरित व प्रोत्साहन (जैसा कि दुनिया के आधुनिक शिक्षाविद परिकल्पना करते हैं)

(8) किशोरों व युवाओं को डिप्रेशन व मानसिक तनाव से मुकाबला करने की क्षमता विकसित करना(आधुनिक मनोवैज्ञानिको को इनसे सीखने की जरूरत)

(9) लिंगानुपात को संतुलित करने का त्योहार (   अपने नवजात बेटियों को मौत के घाट उतारने वाले व अपने आप को आधुनिक व विकसित कहने वाले हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों को सीखने की जरूरत)

(10) बरसाती चर्म रोगों व सर्प बिच्छुओ से बचने जागरूकता अभियान व महान उपकरण डिटोंग (गेड़ी) का भिमाल पेन पर अर्पण 

(11) गोटूल लयोरो ( पढने वाले छात्रों) का भिमा क्लास की रश्म जहाँ पर मौसम के पुर्वानुमान लगाने की प्राकृतिक तकनीक सीखी जाती है(मौसम की लगातार गलत भविष्य वाणी करने वाले भारतीय मौसम विभाग व इसरो को सीखने की जरूरत)

(12)युवाओं में सांस्कृतिक विकास के लिए भिमाल लिगों पेन के 12 वाद्ययंत्रो में से एक हुल्कि पर्रांग नृत्य की शुरुआत ( महानगरों में डिप्रेशन के शिकार युवाओं को सीखने की जरूरत)

( 13) नार (गांव) व्यवस्था की पर्यावरण अनुकूल डिजाइन करने वाले नार गायता के प्रति सम्मान (अव्यवहारिक टाऊन प्लानिंग वाले प्रशासनिक अमले व डिजाइनरो को सबक लेने की जरूरत)

(14) "गण्ड - गोण्ड- गोण्डवाना- गोटूल  गुडी- गायता-गोण्डी" के 7 स्टेप आधारित सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश(दुनिया के ध्वस्त होते सामाजिक आर्थिक राजनीतिक धार्मिक मूल्यों को सही दिशा देने  में लगे प्रवर्तकों को सीखने की जरूरत ) 

(15) परिवार में आई नई बहु/नवविवाहिता/भावी बहु का स्वागत जोहार सम्मान का त्योहार इस दिन नई बहु के हाथों से ही पुरखों के लिए सेवा साम्रगी तैयार किया जाता है, पुरे परिवार के सदस्यों द्वारा आशिर्वाद व जीवन के गुण रहस्यों को साझा किया जाता है ( अपने बहुओ को दहेज के नाम पर हत्या करने वाले तथाकथित सभ्य समाज को सीखने की जरूरत)
आदि आदि अनेक ऐसी चीजें हैं जिनके रहस्यों के उजागर होने पर आधुनिक वैज्ञानिक भी हतप्रभ रह गए हैं, पर  हमारे ही पढे लिखे युवा और तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग घोर अज्ञानता के घेरे में धर्म- आण्डम्बरो में चुपड़े हुऐ दुसरे पर्व त्योहारो में डुबकी लगाने की असफल कोशिश कर रहे हैं।
हे मेरे हडप्पा मोहन जोदडो के निर्माता साथियों आपके डीएनए(जिर्र) में पुरखों द्वारा लिखी रची अनंत किताबों को तो पढकर देखों परखो  फिर मानो

" पुनांग तिन्दाना पंडुम की बहुत बहुत शुभकामनाओं के साथ .जय सेवा! प्रकृति सेवा!  जय भिम

(3)आयरन की कमी को पूरा करने की कोयतोरिन चिकित्सा पद्धति

(4)स्तन कैंसर से बचाव के उपाय व स्तनपान द्वारा नवजात शिशुओं के कुपोषणता से बचाव हेतु जागरूकता अभियान

(6) अच्छी नस्ल के बैलों(कोंदाल) का संरक्षण  :-कृषि विकास में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले व हडप्पा मोहन जोदडो जैसे सभ्यता के निर्माण की आधारशिला रहे वृषभ को ही नये चावल से निर्मित पकवानों का भोग सेवा अर्पण करके ही परिवार में वितरण( इससे गौरक्षा के नाम पर ढोंग कर रहे उपद्रवी गौरक्षको को सीखने की जरूरत )

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